Merikheti.com ने राजस्थान में फरवरी की मासिक किसान पंचायत का आयोजन किया

Merikheti.com के द्वारा मासिक किसान पंचायत 12 फरवरी 2023 दिन रविवार को गाँव सीथल, जिला अलवर (राजस्थान) की जय हिन्द नर्सरी में आयोजित की गयी। मासिक किसान पंचायत के दौरान किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों एवं तकनीकों के बारे में बताया गया था। Merikheti.com द्वारा प्रत्येक माह किसान मासिक पंचायत का आयोजन किया जाता है। जिससे कि किसानों को वर्तमान में कृषि क्षेत्र में हुए परिवर्तन के बारे में बताया जा सके साथ ही उनकी आय में बढ़ोत्तरी करके उनको अच्छे ढंग से अपना जीवन यापन करने के लिए सक्षम बनाया जा सके। किसानों के हित में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान  भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के  वैज्ञानिक  मौजूद रहते हैं। किसान बेझिझक अपने सवाल पूछते हैं, जिनका उत्तर कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञ  विस्तृत रूप में देते हैं। किसान मासिक पंचायत के दौरान डॉ सी.बी. सिंह प्रिंसिपल साइंटिस्ट (RETD) IARI , डॉ विपिन शर्मा कृषि वैज्ञानिक (KvK) G. B नगर और डॉ हरीश कुमार कृषि वैज्ञानिक PUSA (ICAR) सहित अन्य बहुत से कृषि क्षेत्र से जुड़े दिग्गज वैज्ञानिक उपस्थित रहे।  इस मासिक किसान पंचायत में वैज्ञानिकों ने  गाँव सीथल (भिवाड़ी ) के किसानों  को खेती की ऊपज बढ़ाने के लिए कई नुस्खों और तकनीकों के बारे में बताया। सीथल गाँव शुष्क इलाकों में आता है यहां खेती वर्षा पर ही आधारित है यहां के किसानों को बताते हुए वैज्ञानिकों ने कहा की  आप जैविक खेती को अपना कर भी अच्छी पैदावर ले सकते है। वैज्ञानिकों ने किसनो को संजीवक, जीवामृत बनाने की विधि के बारे में बताया। ये दोनों घोल बनाने की विधि निम्नलिखित है। 

संजीवक घोल को बनाने की विधि इस प्रकार है

संजीवक का उपयोग सूक्ष्मजीवों और त्वरित अवशेषों के अपघटन के साथ मिट्टी को समृद्ध करने के लिए उपयोग किया जाता है।  सबसे पहले आपको 500 लीटर  के बंद ड्रम में 300 लीटर पानी में 100-200 किलो गाय का गोबर, 100 लीटर गोमूत्र और 500 ग्राम गुड मिलाना है। इसके बाद इस ड्रम को बंद करके 10 दिनों के लिए गलने के लिए रख दे। 10 दिनों बाद ये संजीवक घोल बनकर तैयार हो जाता है। इसका प्रयोग 20 गुना पानी में घोलकर एक एकड़ में या तो मिट्टी के स्प्रे के रूप में या सिंचाई के पानी के साथ छिड़काव करें।संजीवक घोल का छिड़काव सिंचाई के पानी के माध्यम से उपयोग किया जाता है।  ये भी देखें: Merikheti.com ने की जनवरी की मासिक किसान पंचायत तीन बार इस  घोल का छिड़काव करने से फसल की ऊपज में बढ़ोतरी होती है, एक बुवाई से पहले, दूसरा बुवाई के बीस दिन बाद और तीसरा बुवाई के 45 दिन बाद।

जीवामृत बनाने की विधि

एक बैरल/ड्रम में 100 लीटर पानी लें और 10 किलो गाय का गोबर और 10 लीटर गोमूत्र में मिलाएं। इसके बाद  दो किलो गुड़ और दो किलो चना या कोई भी दाल का आटा इस घोल में  लकड़ी की डंडी से अच्छी तरह मिला लें। इस घोल को 5 से 7 दिन के लिए गलने के लिए रख दें। घोल को नियमित रूप से दिन में तीन बार हिलाएं। जीवामृत का छिड़काव करके या सिंचाई के पानी के माध्यम से मिट्टी में मिला कर इसका उपयोग किया जाता है। तीन बार इस घोल को उपयोग करने की  जरूरत है एक बुवाई से पहले, दूसरा बुवाई के बीस दिन बाद और तीसरा बुवाई के 45 दिन बाद। इस प्रकार यदि किसान इस घोल को प्रयोग करते है तो फसल की ऊपज में इजाफा होता है।  Merikheti.com का मुख्य उद्देश्य किसानों की बेहतरी है। इसलिए प्रत्येक माह किसान मासिक पंचायत का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन से किसानों को कृषि से संबंधित बहुत-सी महत्त्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। उनको फसलों के उत्तम चयन व फसलों की देखभाल किस प्रकार करें आदि आवश्यक पहलुओं के बारे में बेहद गहनता से बताया जाता है। किसान इस मासिक पंचायत में बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी लेते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान प्रदान किया जाता है। मासिक किसान पंचायत के अंतर्गत वैज्ञानिकों से सवाल पूछने वाले किसानों को पुरुस्कृत किया जाता है।